23 March 2017

जाने भी दो...कुछ बातों को

इस पल यदि मैं आपसे कहूँ कि मेरा घर किसी भूकंप पीड़ित क्षेत्र जैसा लग रहा है और वो भी मेरी हाउस मेड की साफ़ सफाई के बाद , आपको शायद यकीन न हो मगर यही सच है। कुछ ज़रूरी काम और घर का नज़ारा ही बदल जाता है। बहुत ज़्यादा बिखरा घर एक सिरदर्द से कम नहीं होता।  

कभी कभी जब आप तड़के ही अपने किचन में तल्लीन होकर सब्ज़ियां काट रहे होते हैं तो ये कोई आश्चर्य की बात नहीं अगर कुछ एक बातें आपको सोचने पर मजबूर कर दें। और फिर आप बीते हुए समय के उन हिस्सों में खुद को तैरते हुए पाते हैं।  हालाँकि ऐसा नहीं करना चाहिए आप जो करने किचन में गए हैं उसे बखूबी पूरा करना है मगर हमेशा सोचा हुआ हो नहीं पाता।  कुछ बातें आपकी केंद्रित आँखों के सामने आ जाती हैं और आप थोड़ा कम बेहतर महसूस करने लगते हैं। वो बातें आपको चैन से अपनी कुर्सी पर नहीं बैठने देती, अक्सर आपकी आँखें शुन्य में भटक जाया करती हैं , होंठ अचानक से सूख जाते हैं , ह्रदय में थोड़ी कम्पन का एहसास होता है , एक छोटी सी नन्ही सी चिंता की लकीर आपके माथे पर खिंच जाती है, अकेलेपन की ख्वाहिश... आप बस खुद में ही नहीं रह पाते। आपका सुबह सुबह का अच्छा मूड सब्ज़ियों के अवांछित हिस्से के साथ बह जाता है। आप अच्छा महसूस करना बंद कर देते हैं।  

मगर आप ऐसी स्थिति में हमेशा नहीं रह सकते , है ना ? नहीं।  तो बेहतर है इन बातों में से कुछ - एक को हम जाने दें। मेरा ये सब कहने का बस यही एक उद्देश्य है कि जहाँ आप उन सभी लोगों को माफ़ नहीं कर सकते जिन्होंने आपको दुःख पहुँचाया है वहीँ आप उनमे से ज़रूर कुछ के साथ नर्म हो सकते हैं।  मान लीजिये, करीब दस लोगों ने आपको तक़लीफ़ पहुंचाई है। उनमे से आप यकीनन छः के साथ काम नहीं कर सकते मगर फिर भी बाकी चार और उनसे जुडी कड़वी यादों को जाने की इजाज़त दे सकते हैं।  बहुत आसान तो नहीं है ये करना मगर हाँ, कोशिश करने वालों की हार भी नहीं होती।  और क्या पता, जब दिन ढल गया हो और आप आराम कर रहे हो, आपकी कितनी चिंताएं यूँ ही दूर हो गयी हों।  सारी तो नहीं मगर कुछ बातें तो हम खुद के लिए भी जाने दे सकते हैं, हैं न ?

 इसी पोस्ट को English में पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें: Forgive while you still can

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